यह ब्लॉग महिलाओं के लिए मध्य-प्रदेश में लागू उषा किरण योजना पर आधारित ब्लॉग है इस ब्लॉग से जुड़ने वाले हर व्यक्ति का स्वागत है .कृपया ई मेल भेज कर इस ब्लॉग से जुड़िये
foto Link http://sevennorth.com/hi/
घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए प्रदेश सरकार ने जो सुविधाएं उपलब्ध करें है उसकी जानकारी संक्षेप मेंयहाँ ... देखिये {देशबंधु से साभार } ऊपर दिए गाहे डोमेस्टिक इन्सीदेंस रिपोर्ट {डी आई आर} के फोर्मेट पर क्लिक कर उसके प्रिंट निकालिए घरेलू हिंसा की शिकार महिलाएं मध्य प्रदेश के किसी भी भाग में हों तो कृपया अपने निकटतम बाल विकास परियोजना अधिकारी से संपर्क कीजिए अथवा girishbillore@gmail.com पर अपनी समस्या भेजिए वह भी संक्षेप में । यद्यपि मेरे द्वारा मेरे क्षेत्र अधिकार से बाहर काम नहीं किया जा सकेगा किंतु आपको जिस माध्यम से आप चाहें जानकारी दी जावेगी की आप किस संरक्षण अधिकारी से संपर्क करें जो आपकी समस्या के निदान हेतु अपना योगदान देंगें
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल ''उषा किरण योजना'' का शुभारंभ ,राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल मध्य-प्रदेश प्रवास के तीसरे दिन 29 जून 2008 को कियाप्रदेश में घरेलू हिंसा रोकने लागू किए गए कार्यक्रम ''उषा-किरण''में पुलिस विभाग की भूमिका को किसी भी स्तर से कम नहीं किया गया अपितु उनके कार्य को आकार दिया गया है।
महामहिम राष्ट्र पति द्वारा शुभारम्भ की गई इस योजना राज्य शासन ने महिलाओं के प्रति होने वाले अत्याचारों पर पूर्ण रोक लगाने और महिलाओं में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से ''घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम-2005'' के तहत उषा किरण योजना बनाई है। योजना में महिलाओं और बच्चों के प्रति जेण्डर पर आधारित हिंसा की सभी कार्यवाहिया जैसे कि शारीरिक, लैंगिक, यौनिक मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक हिंसा के विरुध्द संरक्षण और सहायता का प्रावधान किया गया है। इस योजना से महिलाओं का मनोबल बढ़ेगा और बच्चों की अच्छी परवरिश सम्भव हो सकेगी।
योजना के तहत प्रत्येक जिले में एक हेल्प डेस्क स्थापित की जा रही है। इस केन्द्र में एक टेलीफोन रहेगा जिसके नम्बर का समुचित प्रचार-प्रसार किया जायेगा। इस केन्द्र में चौबीसो घंटे एक न एक आपरेटर उपस्थित रहेगा ताकि पीड़ित महिला के फोन आने पर उसे तत्काल सहायता के लिये प्रभारी अधिकारी के सामने पहुंचाया जा सके।
योजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों में शेल्टर होम की स्थापना प्रस्तावित है। वर्तमान में चार जिलों में नारी निकेतन और आठ जिलों में स्वाधार गृह संचालित हैं। शेष जिलों में आश्रयगृह की सुविधा वाले सेवा प्रदाता को पंजीकृत कर अनुदान दिया जायेगा। केन्द्र शासन द्वारा स्वाधार गृह के प्रस्ताव के मंजूर होने तक हेल्प डेस्क से प्रताड़ित महिला-बच्चों को अस्थायी आश्रय, कानूनी सहायता, चिकित्सा सहायता, पुलिस सहायता, चौबीस घंटे हेल्पलाईन, आवश्यक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता, विपणन व्यवस्था, आर्थिक समृध्दि और पुनर्वास तथा सूचना बैंक की सेवाएं दी जायेंगी। इन सेवाओं के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, विधि, स्वास्थ्य और अन्य संबंधित विभाग उत्तरदायी होंगे। पीड़िता के पुनर्वास के लिये रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, सहकारिता विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग एवं अन्य संबंधित विभाग सहयोग करेंगे।
योजनाकीमानीटरिंगएवंसमन्वयकेलियेजिलाकलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की समिति में पुलिस अधीक्षक, जिला विधिक सहायता अधिकारी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी, संरक्षण अधिकारी [बाल विकास परियोजना अधिकारीयों ]उषा किरण योजना और जिला अभियोजन अधिकारी सदस्य होंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी समिति के पदेन सचिव होंगे।
विभाग की जवाबदेही इस योजना के लागू होने से मुक्ति नहीं मिल जाती पुलिस विभाग को महिला बाल विकास के साथ ठीक उसी तरह से समन्वय बनाना होगा जैसा स्वास्थ्य,और शिक्षा विभाग के द्वारा इस विभाग की मदद ली जाती है ,
उषाकिरण योजना लागू होने से मध्य-प्रदेश देश का वो प्रथम राज्य है जहाँ अंतर-विभागीय समन्वय आधारित योजना लागू की गई है , महिला-बाल विकास विभाग के नव नियुक्तसंरक्षण अधिकारीयों का कहना कि विभाग इस योजना में आशातीत सफलता मिलेगी हमें विश्वास है किंतु सभी सहयोगी विभाग के अधिकारियों को इस योजना का व्यापक कार्य-प्रशिक्षण,ज़रूरी है,
प्रत्येक संरक्षण अधिकारी को अपने दायित्व के निर्वहन के लिए वास्तव में पुलिस विभाग के सतत सहयोग की ज़रूरत है
घरेलू हिंसा से महिला बच्चों को सुरक्षित कराने के लिऐ बेहतर समन्वयन की ज़रूरत से इनकार नही
पुलिस विभाग द्वारा घरेलू हिंसा रोकने,अपराधी प्रवृत्ति के पुरुषों पर ख़ास नज़र रखनी होगी,
सामान्यत: थानों को प्राप्त शिकायतों को दहेज़-प्रताड़ना का रूप दे दिया जाता इससे समझौते की गुंजाइश कम ही रहती है अत: केस की संवेदनशीलता को परख करना ज़रूरी है
घरेलू-हिंसासे सभी कोशिशों के अलावा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण भी सक्रिय एवं महत्त्वपूर्ण भूमिका में है । जिसका मुख्यालय सिविल लाइंस जबलपुर में स्थित है ।
हिन्दयुग्म से साभार धरा से उगती उष्मा , तड़पती देहों के मेले दरकती भू ने समझाया, ज़रा अब तो सबक लो ######################## यहाँ उपभोग से ज़्यादा प्रदर्शन पे यकीं क्यों है तटों को मिटा देने का तुम्हारा आचरण क्यों है तड़पती मीन- तड़पन को अपना कल समझ लो दरकती भू ने समझाया, ज़रा अब तो सबक लो ######################## मुझे तुम माँ भी कहते निपूती भी बनाते हो मेरे पुत्रों की ह्त्या कर वहां बिल्डिंग उगाते हो मुझे माँ मत कहो या फिर वनों को उनका हक दो दरकती भू ने समझाया, ज़रा अब तो सबक लो ######################## मुझे तुमसे कोई शिकवा नहीं न कोई अदावत है तुम्हारे आचरण में पल रही ये जो बगावत है मेघ तुमसे हैं रूठे , बात इतनी सी समझ लो
सदाचारी आदर्श गुरु देव पंडित ईश्वरी प्रसाद तिवारी ने ज़िंदगी भर चप्पल नहीं पहनी ये अलग बात है की इनके जाने कितने विद्यार्थी आज आई ऐ एस /आई पी एस /विदेश वासी हो गए हैं । काय भाई समीर जी सही है न ? इस आदर्श शिक्षक ने बताया की ऋषि-परम्परा का अधुनातन युग में परिपालन कैसे किया जाता है। पिछले सप्ताह बैसाख की कड़ी धूप में घर से जीप पे सवार हो मैं दफ्तर की और जा रहा था कि गढ़ा ओव्हर-ब्रिज पर चढता साया काँधे पर नीला गमछा डाले मुझे दिखा। रोहित को जीप रोकने का निर्देश दिया तब तक जीप काफी आगे बढ चुकी थी। किंतु गुरु से मिले बगैर मुझे जाना न था .... सो रोहित ने गाड़ी पीछे की और ठीक गुरु जी के पास ला खड़ी कर दी । गाड़ी से उतर चरण राज माथे पर लगाने का यह अवसर मैं गंवाना नहीं चाहता था.... ईश्वर ने आस पूरी की। जाने कितने महल बनवाएं होंगे इनने सीधे तौर पर मुझे तिवारी जी के विद्यार्थी होने का गौरव तो नहीं मिला किंतु जब भी मौका मिला मैं इनकी दर्शन कराने इनसे चर्चा करने ज़रूर गया। मुझे मुन्ना-बेटा संबोधन आज भी मिला सुनने । मिलते ही बड़े भाई साहब सतीश बिल्लोरे एवं चचेरे भाइयों क्रमश: प्रशांत और प्रभात के बारे में जानकारी चाहने वाले पंडित जी की याद दाश्त का तो कोई ज़वाब नहीं । "गुरुदेव विद्यादान को सबसे बड़ी पूजा मानतें हैं अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका दाहसंस्कार के बाद बच्चों को पढाने स्कूल आ जाना उनकी कार्य के प्रति प्रतिबद्धता का सर्वोच्च उदाहरण रहा हैं "समाज की मान्यताएं जो भी हों कई मास्टर तब इनकी इस हरकत से इनको नापसंद भी कर रहे थे किंतु योगियों संतों का जीवन सामाजिक होकर भी परालौकिक होता है, इस बात को समझाने वाला इन से सहमत था। "पंडित लज्जा शंकर झा उच्चतर माध्यमिक स्कूलऑफ़ एक्सीलेंसी का यह शिक्षक आज भी उसी सादगी को जी रहा हैं जो भारतीय गुरु शिष्य परम्परा के वाहक अर्वाचीन भारत जिया करते थे.....!" इस ब्लॉग के ज़रिये आप गुरुदेव के बारे में जो जान पाएगें वो कम ही होगा गुरुदेव को जानने के लिए माडल हाई स्कूल यानि अब जिसे पंडितलज्जाशंकरझाउच्चतरमाध्यमिकस्कूलऑफ़एक्सीलेंसी कहा जाता है के ६० से ९० के दशक के विद्यार्थी बता सकतें है इनमें से शायद आप ही हो कोई एक...? यदि नहीं तो भी गुरुदेव से फोन पर बार तो की जा सकती है 07612420238 पर गुरुदेव आज भी पेंशन और जन सहयोग से विधवाओं गरीब महिलाओं को सिलाई मशीन दिलाते ताकि उनका जीवन सरल हो
कल "एक माइक्रो-ब्लॉगिंग चर्चा"के उपरांत आज ब्लॉग पर प्रकाशित अति सूक्ष्म चर्चा है जिसे देखना माइक्रो स्कोप के बिना सम्भव नहीं है ।आप खामखां कह रहे हैं आज चर्चा की छुट्टी है। भैया चिट्ठी वालो ने ज़रूर नहीं लिखी कोई चिट्ठी । फ़ुरसतियाजी ने भी फुर्सत न होने का हवाला देते हुए बताया नई केबिनेट जो ताऊ रामपुरिया ने बनाई है उसमें सभी बीजी है हम भी । आप को हम बता दें की श्री मान धीरज शाह उर्फ़ धीरू भैया आज तक के जबपुर संवाद दाता हैं वे टोटल रिलेक्स हैं यकीन न हो तो यहाँ चटका लगाइए ।
इस ब्लॉग सहित मेरे सभी ब्लॉग'स पर,गूगल बाबा की झोली से फोटो जुगाड कर पोस्ट किए गएँ हैं . साथ ही इन ब्लॉग'स की,किसी विषयवस्तु से किसी को कोई आपत्ति हो.तो कृपया आप मुझे मेल करें ताकि भावातिरेक में लिखी किसी पोस्ट/उसके अंश का सुधार किया जा सके.सार्थक प्रतिक्रयाएँ देकर सृजन शीलता की दिशा दीजिए मेरा मिशन जोड़ना है न कि अनावश्यक विवादों की भूमि,बनाना है. फ़िर भी मानवीय भूलों के लिए आपकीसचेतक-ध्वनियाँ स्वागत योग्य हैं किंतु हंगामा स्वीकार्य नहीं
तुम बिन सच कितना
खाली सा
मेरे मन का जोगी दर्पण
तुम चाहो तो
तोड़ के बंधन
मेरे मन के गीत सजा दो
तुम चाहो तो
प्रीत निवेदन
मेरा इक पल में ठुकरा दो !
टूट न जाए
संयम मनका
कुछ मनके संयम के गुथना
जब तक मेरी
नींद न टूटे
मेरे सपन में बस तुम रुकना !
स्वपन प्रिया ये
दुनिया झूठी
हम-तुम को न सह पाएगी
अपने पावन
नातों को यह
जाने क्या-क्या कह जाएगी
टूट न जाए,
संयम मनका
कुछ मनके
संयम के गुथना,
जब तक जारी
-"सपन सवारी"
चिंतन का घट पूरन रखना !
गिरीश बिल्लोरे मुकुल